पर्ची शुल्क बढ़ने से लोगों में नाराज़गी
मेडिकल कॉलेज चंबा में पर्ची का शुल्क 10 रूपए किए जाने पर लोगों में भारी रोष देखने को मिल रहा है। लोगों का कहना है कि एक मजदूर जिसकी दिहाड़ी लगभग ₹450 होती है, वह इन पैसों को में दवाई लगाए, टेस्ट करवाए या अपने परिवार के लिए रोटी की व्यवस्था करे। लोगों का कहना है कि आज के समय में दवाइयों के दाम पहले ही आसमान छू रहे हैं, ऐसे में यह फैसला आम और गरीब लोगों के लिए और भी परेशानी खड़ी कर रहा है। उनका कहना है कि आज के समय में इलाज करवाना ही गरीब लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
अस्पताल में दवाइयों और सुविधाओं की कमी
स्थानीय लोगों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज चंबा में बीपी और शुगर जैसी बीमारियों की जरूरी दवाइयां भी उपलब्ध नहीं हैं। कुछ महिलाओं का कहना है कि अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जैसी सुविधाएं भी सुचारू रूप से नहीं मिल रही हैं। उनका सवाल है कि क्या अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं है या सरकार यह सुविधा सरकारी अस्पतालों में देना ही नहीं चाहती।
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टेस्ट बाहर करवाने की मजबूरी और लंबी लाइनें
महिलाओं का कहना है कि अस्पताल में सुविधाएं सही तरीके से न मिलने के कारण उन्हें कई टेस्ट बाहर निजी लैब में करवाने पड़ते हैं, जहां एक टेस्ट के लिए लगभग ₹2000 तक खर्च करना पड़ता है। इसके अलावा सरकारी अस्पताल में लंबी-लंबी लाइनों में लगना भी मरीजों और खासकर महिलाओं के लिए बड़ी समस्या बन गया है। इन सभी समस्याओं को चंबा के लोगों ने मीडिया से बातचीत के दौरान सामने रखा।
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