सरकारी नौकरी का सपना और माँ की सलाह
ऊना के अबोटा गांव के रहने वाले अनुभव सरकारी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। परिवार को उम्मीद थी कि उनका बेटा सरकारी नौकरी करेगा। लेकिन कई प्रयासों के बाद भी अनुभव को सरकारी नौकरी नहीं मिली। तब उनकी माँ ने उन्हें सलाह दी कि वे अपना खुद का काम शुरू करें। माँ की इस बात को मानते हुए अनुभव ने मधुमक्खी पालन का व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया।
मधुमक्खी पालन की ट्रेनिंग और शुरुआत
व्यवसाय शुरू करने से पहले अनुभव ने इसे अच्छे से समझना जरूरी समझा। उन्होंने सोलन (नौणी) यूनिवर्सिटी से एक महीने की मधुमक्खी पालन की ट्रेनिंग ली और साथ ही शेर-ए-कश्मीर विश्वविद्यालय से एक सप्ताह का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री मधु विकास योजना के तहत 1 लाख रुपये का ऋण लिया, जिससे उन्होंने 25 मधुमक्खी बॉक्स खरीदे। इस योजना में उन्हें 80% की सब्सिडी भी मिली।
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मेहनत से मिली सफलता और व्यापार का विस्तार
मधुमक्खी पालन शुरू करने के पहले ही साल में अनुभव को 48,000 रुपये का लाभ हुआ और 25,000 रुपये की बचत भी हुई। उन्होंने मधुमक्खियों के व्यवहार और मौसम के प्रभाव को समझने पर विशेष ध्यान दिया, ताकि शहद की गुणवत्ता बेहतर बनाई जा सके। आगे चलकर उन्होंने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत 10 लाख रुपये का अतिरिक्त ऋण लिया और अपने व्यवसाय को बड़े स्तर पर बढ़ाने का निर्णय लिया।
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पहाड़ी शहद’ ब्रांड और युवाओं के लिए प्रेरणा
अनुभव ने अपने शहद को एक ब्रांड के रूप में बाजार में उतारा और उसका नाम “पहाड़ी शहद” रखा। वे मौसम के अनुसार अपनी मधुमक्खियों को उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा जैसे राज्यों में ले जाते हैं, ताकि अलग-अलग फूलों से विभिन्न प्रकार का शहद तैयार किया जा सके। आज उनका शहद बाजार में 500 से 1200 रुपये प्रति किलो तक बिकता है। इसके साथ ही वे स्थानीय लोगों को रोजगार दे रहे हैं और युवाओं को मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
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